नमस्ते ........
मैं अब...कुवैत..में आया हूँ। इधर आके यहाँ की संस्कति के बारे में बारीकी नज़ारा मिलते हैं। २ अक्टूबर को मैं इधर आया। अब ढाईमहीने हुए। मैं अपनी परिवार को बहुत याद करता हूँ। मेरे ब्बेवी,बच्चे ,बहिन,माँ, सब बहुत याद आत्ती है। हम अपनी रिश्तों को ,वो प्यार और बंधन को तब ही समाच सकते हैं जब हम उन लोगों से बहु दूर ओउर बिचडे हुए हों.....................

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